Hindi shayari

जो जलता है किसी को ,
खुद भी जसलता है जरूर,
शम्मा भी जलती रही,
परवाना जलजान के बाद।

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लिखी है खून से चिटठी सहाई मत समझना,
मरता हूं तेरी याद में जिंदा मत समझना।

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दामने जिस्त मे अब कुछ भी नही है बाकी,
मौत आई तो यकीनन उसे दोखा होगा।

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सियाही आखो से लेकर ये नामां तुमको लिखता हूं,
के तुम नामां को देखो और तुम्हें देखे मेरी आँखें।

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अब कौन सि बात राह गयी ,
ये बात भी गई।
यानी कभी-कभी की बात भी गई।

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चन्द दिन,आह मियां, में भी खुदई कर लूं,
झूठ ही कहदी के हाँ, तुमसे मोहब्बत है हमें।

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मोहब्बत का तुमसे अक्सर क्या कहूं,
नजर मिल गई दिल धड़कने लगा।

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किसे ने मोल ना पूछा दिले शिकायत का,
कोई खरीद के टूटा पियाला क्या करता।

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जो कहोगे तुम ,कहेंगे हम भी हां यू ही सही,
आपकी अगर यू खुशी है ,मोहोब्बत यू ही सही।

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मैंने माना के मुझे उसे मोहोबात न रही,
हमनशीं फिर भी मुलाकात से जी डरता है।

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दिल के हल की तरफ किसी की नजर जाती है।
इश्क की उम्र तमान में गुजर जाता हैं।

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झटपटा वक़्त है, बहता हुआ दरिया ठहरा,
सुबह से शाम हुई दिल न हमारा ठहरा।

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दर्द सीने में जरा जगा तो आंखे खुल गई,
दिल मे कुछ चोटें उभर आई तो आँसू आ गए।

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देख लीजिए चलके अपने चाहने वाले कि लाश,
आप फरमाते थे ,ऐसे कज़ा आती नही।

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जब आए थे हम रोते हुए आऐ थे,
आब जायेंगे, आरों को रुला जायेंगे।

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जनाजा रोककर मेरा ,वो इस अंदाज से बोले,
गली हम ने कही थी,तूम तो दुनिया छोड चले।

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मारने का नही खोफ,मगर डर है तो इतना,
निकले न मेरी लाश कहीं आप के घर से।

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जब सुना तुम भी मुझे याद किया करते हो,
क्या कहूं हद न रही कुछ मेरी हैरानी की।

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खोई हो कभी चोट तो दुख औरों के समझे,
वो हास् रहे है और यहां जापे बनी है।

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