Shayari Ki Duniya

मिलन का वादा उनके मुंह मे निकल गया ,
पूछी जगा तो मैंने तो बोले कि ख्वाब में।

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आए जो मेरे यास तो मुंह फैर के बैठे
यह आज नया आपने दस्तूर निकाला ।

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हवा के साथ सौं…सौ खा गए बल ,
नजाकत देखिये उनकी कमर की।

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पूछा जो उसने चंद निकलता है किस तरह,
जुल्फों को रुख पे डाल के झटका दिया कि यूं।

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कितने अनजान हैँ , क्या सादगी से पूछते हैं ,
कहिये, क्या मेरी किसी बात पे रोना आया।

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अजब आरजू है , अनोखी तलब है ,
तुझी से तुझे मांगना चाहता हूं।

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शक उनको था कि रात में बोसा न ले कोई,
गालों पे रखके सोए” कलाई तमाम राता ।

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दर्द का मेरे यकीन आप करं या न करें,
अर्ज इतनी है कि इस राज की चर्चा न करें।

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तुम जिसको समझते हो कि है हुस्न तुम्हारा ,
मुझको तो वो अपनी ही मुहब्बत नजर आईं ।

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फरियाद का मजा है , लब पे रहे खामोशी ,
आंखें ये कह रही हैं , फरियाद कर रहे हैँ । 

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जो कुछ था वो सब ले ही चुकीं थी तेरी जीवन,
इक जान ही बाकी है वो है जाने नजर केयू आज ।

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दुनिया से वया खुदा से भी घबरा के कह दिया ,
वो मेहरबां नहीं ती कोई मेहरबां नहीं ।
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तुमको हमसे प्यार था,
मैं यह गलतफहमी का शिकार था।

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तेरी इश्क की इतना चाहता हूं,
मेरी सादगी देख क्या चाहता हूं।

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हम बैठे उनके पास तलब जो किया,
हसके वह बोले यह हुस्न की दौलत है, लुटाई नहीं जाती।

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मेहरबा होके बुला लो मुझे चाहे जिस वक्त,
में गया वक्त नहीं हूं कि फिर आ भी ना सकूं।

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कोई हद ही नहीं शायद मुहब्बत के फंसाने की,
सुनाता जा रहा है जिसको जितना याद होता है।

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जिन जिन को था ये इश्क का आजार मर गये ,
अक्सर हमारे साथ कै बीमार मर गये ।

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ये कैसी बेखुदी है? लिख गया हूं,
मै’ अपने आप के बदले तेरा नाम ।

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जमाना हंसता है मुझ पर हजार बार हंसे ,
तुम्हारी आंख में लेकिन नमी ” सी क्यों आई?

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बैठे हुए देते है वो दामन की हवाएं,
खुदा करे हम न कभी होश में आएं।

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आबादी भी देखी है , वीराने भी देखे हैं ,
जो उजड़े और न बसे, दिल बो निराली बस्ती है।

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कातिल का नाम लिख दिया क्यों मेरी कब्र पर,
लेते हैं राहगीर भी माझे मजार पर।

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तोड़कर सीने को मेरे दिल में अपना घर किया,
कौन कहता है कि वे तीरे नज़र नहीं?

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मै क्या कहू कहाँ है मुहब्बत कहाँ नहीं ,
रग… -रग मे दौडती नसों में लहू बन कर।

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फेक दू” दिल को अभी चीर के पहलू अपना ,
तुझ पे काबू नही , दिल पर तो है काबू अपना।

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क्या जानिए कम्बख्त ने क्या हम पे किया सहर ,
जो बात ” न थी मानने की , मान गए . हम ।

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दिल टटने से थोडी सी तकलीफ तो हूई ,
लेकिन तमाम उम्र का आराम हो गया।

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फिदले पहर वो चांद सितारों से पूछ लो,
क्या क्या न दुख दिये है शबे इन्तजार ने।

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‘ न मरते है न नींद आती है वो सूरत याद आती है,
ये जीते… जाते हम पर कयामत जब गजरती है ।

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तड़प तड़प के गजारी तमाम रात,
सुबह हूई तो सितारों ने साथ छोड़ दिया ।

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तुम यास ही नही तो मजा जिन्दगी का क्या,
जीता नहीं हुं सांस लिए जा रहा हू मै।

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वो क्या गए कि नींद भी आंखों से ले गए,
यानी कि ख्वाब में भी न आए तमाम रात ।

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लाऊंगा में कहां से जुदाई का हौंसला?
क्यों इम कदर करीब मेरे आ रहे हो?

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